प्रस्तावना
स्वयं सहायता समूह संचालन मार्गदर्शिका को तैयार करने का उद्देश्य स्वयं सहायता समूह के गठन, प्रबंधन, एवं परिचालक हेतु उचित मार्गदर्शन प्रदान करने हेतु की गई है।
यह मार्गदर्शिका स्वयं सहायता समूह के सामुदायिक सहजकर्ता (CRP) समूह के अगुवाई एवं सदस्यों को समूह गठन के संबंध में समझ विकसित करने में सहायक होगी। इस मार्गदर्शिका के माध्यम से गरीब परिवारों को वित्तीय समावेश के महत्व एवं प्रारंभिक अनुभवों एवं सीखो से अवगत कराने का भी प्रयास किया गया है।
यह समूह मूलत बचत की अवधारणा पर कार्य करते हैं। इसका मूल उद्देश्य साथ में रहकर अपनी छोटी-छोटी आवश्यकताओं की पूर्ति करना था। इसके बाद में अन्य कार्यों को करने में उपयोग में लिया जाने लगा। इसके अच्छे अनुभव के कारण इसे ग्रामीण विकास हेतु एक अच्छी रणनीति माना जाने लगा। इसे आधार मानकर विभिन्न परियोजनाओं को भी लागू किया गया। जिसके मिश्रित परिणाम रहे। वर्तमान में देखा जाए तो अच्छे स्वयं सहायता समूह का गठन करने के लिए कार्यकर्ताओं के स्तर पर स्पष्टता होना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि अनेक परियोजनाओं में स्पष्टता नहीं होने के कारण सही समूह का गठन नहीं हुआ एवं उद्देश्य को प्राप्त करने में अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ा। इन अनुभवों के आधार पर ही इस सरल मार्गदर्शिका को विकसित किया गया है। इसमें स्वयं सहायता समूह की अवधारणा, उसके नियम, प्रबंधन, लेखा इत्यादि पर विस्तार से सरल हिंदी में समझाया गया है।
स्वयं सहायता समूह की परिभाषा
स्वयं सहायता समूह किसी गांव के एक ही टोली / मोहल्ले में सामान्यता एक समान सोंच रखने वाली औरतों द्वारा बनाया गया एक अनौपचारिक महत्वपूर्ण संगठन है।
- एक स्वयं सहायता समूह में 11-15 सदस्य हो सकते हैं।
- किसी भी समूह के सशक्त होने में उसके सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। वह समूह ही प्रभावी तरीके से कार्यशील रहे हैं जिसके सदस्यों ने समूह को चलाने के लिए सामूहिक रूप से विचार- विमर्श कर उसके नियम एवं रीति - नीति तय किए हैं और उसका पालन भी सुनिश्चित करते हैं।
स्वयं सहायता समूह बनाने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
कोई भी जब संगठन के माध्यम से किया जाता है तो वह सरल हो जाता है एवं इसके अनेक उदाहरण हैं। स्वयं सहायता समूह बनाने के उद्देश्य अत्यंत सरल एवं महत्वपूर्ण है-- ग्रामीण गरीबों के मध्य संगठन की भावना को सशक्त करना।
- समूहों सदस्यों में बचत की आदत डालना।
- सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया से जोड़ना।
- आवश्यकतानुसार ऋण अपने समूह अथवा चयनित फाइनेंशियल बैंकों के माध्यम से 8.5 प्रतिशत से लेकर 12.5 प्रतिशत सालाना ब्याज दर पर आसानी से प्राप्त होता है।
- सामूहिक रूप से अपने उत्पादों / फसल की बिक्री बाजार में करने का मौका मिलता है, जिससे अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
स्वयं सहायता समूह की सदस्यता
स्वयं सहायता समूह का सदस्य बनने के लिए निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखा आवश्यक है- परिवारों की महिला सदस्य को सदस्य बनाएं क्योंकि महिलाओं में पुरुष की अपेक्षा बचत करने की प्रवृत्ति अधिक होती है।
- परिवार का मतलब एक ऐसी इकाई से है जिसका चूल्हा अलग हो।
- प्रत्येक परिवार से एक ही महिला स्वयं सहायता समूह का सदस्य बन सकती है, जिनकी उम्र 18 वर्ष से अधिक हो।
- समूह में प्रत्येक व्यक्ति का जुड़ने का शुल्क 275 है (बेटी प्रोत्साहन समेत 375)।
- समूह के सभी सदस्यों का बीमा अनिवार्य होगा। ऋण बीमा होने के 90 दिन बाद ही होगा।
- समूह में काम करने की इच्छुक हों।
- प्रत्येक बैठक में समय देने के लिए तैयार हों।
बेटी प्रोत्साहन
इसके अंतर्गत कोई भी सदस्य जिसकी बेटी की उम्र 6 से 14 वर्ष के बीच है वह फॉर्म भर सकता है, बेटी की आयु 18 वर्ष के बाद विवाह के लिए आर्थिक मदद दी जाती है।
चार वर्ष तक प्रत्येक माह 1042 रुपये की किश्त जमा होगी तत्पश्चात विवाह के लिए 1 लाख 51 हजार का प्रोत्साहन दिया जाएगा।
समूह के सदस्यों की जिम्मेदारी
किसी समूह के प्रभावी संचालक हेतु आवश्यक है कि उसके सदस्य तय नियमों का समय पर पालन करें। समूह के नियम सदस्यों द्वारा ही मिलकर बनाए जाते हैं। उन्हें बनाते समय ही यह ध्यान रखना आवश्यक होगा की वे वास्तविक हो एवं सदस्य उनका पालन पूर्ण जवाबदारी से कर सकें। किसी भी समूह के सदस्यों की जिम्मेदारी निम्नानुसार तय की जा सकती है। यह सुझाव आत्मक है एवं समूह चाहे तो और जिम्मेदारियां जोड़ सकता है। समूह के नियमों को तय करने में एवं उन्हें अमल में लाने के लिए समूह के सदस्यों को राजी करना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। प्रत्येक समूह के सदस्य के लिए आवश्यक होगा कि वह है-।- समूहों की बैठकों में नियमित रूप से भाग लें।
- मूहिक निर्णय में भागीदारी लें और उनका पालन करें।
उधार या कर्ज
समूह अपने सदस्यों की आवश्यकताओं एवं जरूरतों को पूरा करने के लिए आंतरिक उधार प्रदान करती है।
ऋण मांगने की प्रक्रिया-- समूह के सदस्य ऋण लिखित या मौखिक मांग सकते हैं।
- समूह से जो सदस्य ऋण लेना चाहते है, वे ऋण की जरूरत, ऋण की रकम ,ऋण वापसी का समय तथा किस्तों की संख्या बताते हैं।
- ऋण मांगते समय सदस्य समूह को अपनी आवश्यकता का विस्तार।
- ऋण हमेशा बैठक में ही मांगा जाये न की पदाधिकारियों के घर जाकर।
- किसी भी सदस्य को एक समय में केवल एक बार ही ऋण दिया जा सकता है ,पुराना उधार चुकाने के बाद ही नया उधार दिया जा सकता है।
- समूह के लिये गये पिछले ऋण को समय पर वापस किया या नहीं।